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दुनिया की पहली ASF वैक्सीन का भारत में ट्रायल! अंबिकापुर पहुंचे वैज्ञानिक, सूअरों को दी गई बूस्टर डोज

अंबिकापुर. अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) जैसी घातक बीमारी से निपटने की दिशा में भारत एक बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में विकसित की गई अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन का ट्रायल छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित शासकीय पिग फार्म में जारी है। इस महत्वपूर्ण परीक्षण के तहत भोपाल से वैज्ञानिकों की टीम अंबिकापुर पहुंची है, जहां सूअरों को वैक्सीन की बूस्टर डोज दी जा रही है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।

यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो यह न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के सूकर पालकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

अंबिकापुर में चल रहा वैक्सीन ट्रायल

शासकीय पिग फार्म, सकलो (अंबिकापुर) को भारत सरकार ने अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन के ट्रायल के लिए चुना है। यहां मार्च 2026 से परीक्षण प्रक्रिया जारी है।

फार्म प्रबंधक डॉ. अजय अग्रवाल के अनुसार:

  • वैक्सीन ट्रायल मार्च माह में शुरू हुआ।
  • परीक्षण राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), भोपाल द्वारा किया जा रहा है।
  • वैज्ञानिकों की टीम नियमित अंतराल पर निरीक्षण कर रही है।
  • सूअरों की स्वास्थ्य स्थिति और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का मूल्यांकन किया जा रहा है।

वैज्ञानिकों की टीम कर रही निगरानी

ट्रायल के तहत भोपाल से पहुंचे वैज्ञानिक:

  • डॉ. वेंकटेश
  • डॉ. सेंथिल कुमार
  • डॉ. राजू कुमार

लगातार परीक्षण की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। वैज्ञानिक बूस्टर डोज के बाद सूअरों की शारीरिक स्थिति, प्रतिरक्षा क्षमता और संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।

क्या है अफ्रीकन स्वाइन फीवर?

अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) सूअरों में फैलने वाली एक अत्यंत खतरनाक वायरल बीमारी है।

इस बीमारी की प्रमुख विशेषताएं:

  • मृत्यु दर बहुत अधिक होती है।
  • घरेलू और जंगली दोनों प्रकार के सूअर प्रभावित होते हैं।
  • तेजी से फैलने वाला संक्रमण है।
  • वर्तमान में इसका कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है।
  • संक्रमित पशुओं में भारी आर्थिक नुकसान होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी इंसानों को प्रभावित नहीं करती, लेकिन सूकर पालन उद्योग के लिए बेहद विनाशकारी साबित होती है।

दुनिया भर के लिए बन सकती है उम्मीद

वर्तमान में भारत सहित अधिकांश देशों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के लिए कोई पूर्ण रूप से स्वीकृत व्यावसायिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि इस वैक्सीन ट्रायल पर देश-विदेश के पशु वैज्ञानिकों और पशुपालकों की नजर बनी हुई है।

यदि परीक्षण सफल होता है तो:

  • सूअरों की मौत दर में कमी आएगी।
  • पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
  • सूकर पालन उद्योग को बड़ा लाभ होगा।
  • ASF नियंत्रण में ऐतिहासिक सफलता मिल सकती है।

जैव-सुरक्षा मानकों का हो रहा पालन

वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी. के. मिश्रा ने बताया कि ट्रायल के दौरान सभी वैज्ञानिक मानकों और बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

ट्रायल में:

  • संक्रमित जोखिमों की निगरानी
  • नियंत्रित वातावरण में परीक्षण
  • नियमित स्वास्थ्य जांच
  • वैज्ञानिक डेटा संग्रह

जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ बना शोध का महत्वपूर्ण केंद्र

अंबिकापुर के सकलो स्थित शासकीय सूकर फार्म का चयन इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ पशुपालन और पशु स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह परियोजना राज्य के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।

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