
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत चम्पकनगर गांव में तालाब में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे खेलते-खेलते गांव के तालाब तक पहुंच गए और नहाने के दौरान गहरे पानी में चले जाने से यह दर्दनाक हादसा हो गया। घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीणों ने जलाशयों के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने की मांग प्रशासन से की है।
जानकारी के अनुसार यह हादसा शुक्रवार, 31 जुलाई को कोतवाली थाना क्षेत्र के चम्पकनगर गांव में हुआ। मृत बच्चों की उम्र लगभग 5 से 6 वर्ष बताई जा रही है। दोनों मासूम गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलने के लिए घर से निकले थे। खेलते-खेलते वे गांव के तालाब के पास पहुंच गए। कुछ देर बाद दोनों बच्चों ने तालाब में नहाना शुरू कर दिया। इसी दौरान वे धीरे-धीरे गहरे पानी की ओर चले गए और पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा सके। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआत में किसी को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि बच्चे गहरे पानी में फंस गए हैं। जब आसपास मौजूद लोगों ने बच्चों को नजर नहीं आने पर तलाश शुरू की तो तालाब में डूबने की आशंका हुई।
सूचना मिलते ही गांव के बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और तत्काल बच्चों की तलाश शुरू की। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को तालाब से बाहर निकाला और बिना देर किए अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि अस्पताल पहुंचने तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। बच्चों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया। गांव के लोगों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया और शोक व्यक्त किया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण तालाब में डूबना माना जा रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और घटना से संबंधित आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के तालाबों और जलाशयों के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या सुरक्षा घेरा भी नहीं लगाया गया है, जिससे छोटे बच्चे अनजाने में पानी के करीब पहुंच जाते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के तालाबों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, चेतावनी संकेत लगाए जाएं और संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बरसात के मौसम में तालाब, नदियां और अन्य जलाशय पूरी तरह भर जाते हैं, जिससे पानी की गहराई बढ़ जाती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में अभिभावकों से भी अपील की जा रही है कि छोटे बच्चों को अकेले तालाब, नदी या अन्य जल स्रोतों के पास न जाने दें। प्रशासन और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से ही ऐसे हादसों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।




