
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर राजस्थान में कथित तौर पर फर्जी छापेमारी करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में राजस्थान की एक अदालत के आदेश पर दो तत्कालीन थाना प्रभारियों (TI) समेत छह पुलिसकर्मियों और 90 से अधिक अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। घटना ने दोनों राज्यों के पुलिस प्रशासन में हलचल पैदा कर दी है।
यह मामला जनवरी 2026 में चलाए गए एक मादक पदार्थ विरोधी अभियान (NDPS ऑपरेशन) से जुड़ा है, जिसकी वैधता पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। अदालत द्वारा जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले की पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र स्थित घटाखेड़ी गांव में छापेमारी की थी।
उस समय पुलिस ने दावा किया था कि:
• बड़ी मात्रा में एमडी ड्रग्स बरामद की गई।
• ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायन मिले।
• करोड़ों रुपये मूल्य की मशीनरी जब्त की गई।
• दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई को उस समय नशे के खिलाफ बड़ी सफलता बताया गया था।
कैसे उठा विवाद?
छापेमारी के कुछ सप्ताह बाद गांव के निवासी और गिरफ्तार आरोपियों के रिश्तेदार 75 वर्षीय हामिद खान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि:
• लगभग 100 पुलिसकर्मी गांव में पहुंचे थे।
• कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
• कुछ लोगों को बिना उचित प्रक्रिया के अपने साथ ले जाया गया।
• पूरी कार्रवाई मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण थी।
इसके बाद अदालत ने मामले की जांच के आदेश दिए।
जांच रिपोर्ट के बाद कोर्ट का बड़ा फैसला
जांच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की। रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध बनता हुआ पाया।
इसके बाद अदालत ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
किन अधिकारियों पर दर्ज हुई FIR?
FIR में जिन पुलिसकर्मियों के नाम शामिल बताए गए हैं, उनमें:
• तत्कालीन थाना प्रभारी शशि उपाध्याय
• तत्कालीन थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत
• राखी गुर्जर
• अजय जाट
• शुभम
• राहुल विश्वकर्मा
के अलावा अन्य अज्ञात पुलिसकर्मी और लगभग 90 अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं।
MP पुलिस का क्या कहना है?
आगर-मालवा पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि राजस्थान में दर्ज FIR की जानकारी विभाग को मिल चुकी है और जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार:
• राजस्थान पुलिस के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है।
• आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
• मामले की विभागीय समीक्षा की जा रही है।
• समीक्षा के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय कार्रवाई पर क्या स्थिति है?
फिलहाल संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ किसी बड़ी विभागीय कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक राज्य की पुलिस द्वारा दूसरे राज्य की सीमा में की गई कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह अंतरराज्यीय पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा बड़ा मामला बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी कार्रवाईयों के लिए राज्यों के बीच समन्वय और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर और अधिक सतर्कता बरती जा सकती है।
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।




