बिजली विभाग में 7 करोड़ का खेल! एकाउंटेंट ने पत्नी-रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किए करोड़ों, नौकरी से बर्खास्त

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बिजली विभाग में करोड़ों रुपये के गबन का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विभाग में तैनात एक लेखाकार ने सरकारी धन को कार्यदायी संस्था के खाते में भेजने के बजाय अपने और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। जांच में करीब 7 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। मामले में आरोपी को पहले निलंबित और गिरफ्तार किया गया था, जबकि अब उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि शेष राशि की वसूली के लिए भी कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कैसे हुआ करोड़ों रुपये का गबन?
जानकारी के अनुसार, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत एक कार्यदायी संस्था को लगभग 6.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। लेकिन विभाग में कार्यरत लेखाकार ने कथित तौर पर फर्जीवाड़ा करते हुए यह रकम अपने और अपने परिवार के सदस्यों के खातों में ट्रांसफर कर दी।
मामला तब सामने आया जब बैंक अधिकारियों को एक खाते में अचानक इतनी बड़ी रकम आने पर संदेह हुआ। उन्होंने इसकी सूचना विभाग को दी। दूसरी ओर, संबंधित कंपनी ने भी भुगतान न मिलने की शिकायत दर्ज कराई।
जांच में सामने आई बड़ी सच्चाई
प्राथमिक जांच के बाद पता चला कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने विस्तृत जांच कराई, जिसमें करोड़ों रुपये के गबन की पुष्टि हुई।
जांच के प्रमुख निष्कर्ष:
• सरकारी भुगतान को निजी खातों में ट्रांसफर किया गया।
• रकम का बड़ा हिस्सा परिवार के सदस्यों के खातों में भेजा गया।
• आरोपी की पत्नी के खाते में भी बड़ी राशि जमा कराई गई।
• कई वित्तीय लेन-देन संदिग्ध पाए गए।
पूछताछ के दौरान हुआ फरार
मामले का खुलासा होने के बाद आरोपी लेखाकार को निलंबित कर पूछताछ शुरू की गई। लेकिन पूछताछ के दौरान वह फरार हो गया। बाद में उसने अदालत में आत्मसमर्पण किया और कई महीनों तक जेल में रहा।
जमानत मिलने के बाद आरोपी दोबारा विभाग में कार्यभार ग्रहण करने नहीं पहुंचा। इसके बाद विभाग ने उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया।
पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में भेजे पैसे
जांच एजेंसियों को पता चला कि गबन की गई रकम का बड़ा हिस्सा आरोपी ने अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया था। आरोपी की पत्नी भी बिजली विभाग में कार्यरत बताई जाती है।
अधिकारियों का मानना है कि पूरे नेटवर्क की वित्तीय जांच से और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
करोड़ों से बनाई आलीशान संपत्ति
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर गबन की रकम से कई महंगी संपत्तियां खरीदीं।
बताया जा रहा है कि:
• शहर के पॉश इलाकों में डुप्लेक्स और फ्लैट खरीदे गए।
• कुछ संपत्तियां पत्नी के नाम पर ली गईं।
• प्रयागराज में भी निवेश और संपत्ति बनाई गई।
• लग्जरी कार, महंगे गैजेट्स और आलीशान जीवनशैली अपनाई गई।
कितनी रकम हुई बरामद?
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक लगभग 3.13 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। वहीं करीब 3.76 करोड़ रुपये की शेष राशि की वसूली के लिए कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।
विभाग ने दिया सख्त संदेश
इस पूरे मामले को बिजली विभाग में हुए बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद विभाग में वित्तीय लेन-देन और भुगतान प्रक्रियाओं की निगरानी और सख्त की जा सकती है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और विभाग गबन की पूरी रकम की वसूली के प्रयास में जुटा हुआ है।




