
कानपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने गुरुवार को आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026 और किसान सम्मान समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती को भारत की समृद्धि का मजबूत आधार बताते हुए कहा कि यह खेती किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत ने विकास और विरासत दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब समय आ गया है कि कृषि क्षेत्र में भी ऐसे मॉडल अपनाए जाएं, जो पर्यावरण के अनुकूल हों और किसानों को अधिक लाभ पहुंचाएं।
प्राकृतिक खेती बनेगी किसानों की ताकत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम है। इससे खेती की लागत कम होती है और किसानों का मुनाफा कई गुना तक बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है और किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
प्राकृतिक खेती के प्रमुख लाभ
- रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।
- खेती की लागत घटती है।
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
- फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है।
- किसानों की आय में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।
34 जिलों को किया गया चिन्हित
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए विशेष योजना बनाई है।
चयनित क्षेत्र
- मां गंगा के किनारे स्थित 27 जिले
- बुंदेलखंड क्षेत्र के 7 जिले
इन कुल 34 जिलों में प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता के आधार पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों को प्राकृतिक कृषि मॉडल के रूप में विकसित करना है, ताकि अन्य जिले भी इससे प्रेरणा ले सकें।
गो-आधारित खेती को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गो-आधारित खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 34 जिले इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
राज्य सरकार किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए विभिन्न योजनाओं और संसाधनों के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रही है।
प्रदेश में गोशालाओं की स्थिति
- 7,700 से अधिक गोशालाएं संचालित
- लगभग 14 लाख निराश्रित गोवंश संरक्षित
- राज्य सरकार द्वारा देखभाल और प्रबंधन
सरकार का मानना है कि गोवंश आधारित कृषि मॉडल प्राकृतिक खेती को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र बनेंगे मॉडल सेंटर
प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों को प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनाया गया है।
इन केंद्रों में किसानों को—
- प्राकृतिक खाद बनाने की जानकारी
- जैविक कीटनाशक तैयार करने की तकनीक
- कम लागत वाली खेती के तरीके
- मिट्टी संरक्षण के उपाय
सिखाए जाएंगे।
क्यों बढ़ रही प्राकृतिक खेती की मांग?
देशभर में बढ़ती रासायनिक खेती की चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती को एक टिकाऊ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे—
- भूमि की गुणवत्ता सुधरती है
- जल प्रदूषण कम होता है
- उत्पादन लागत घटती है
- दीर्घकालीन कृषि स्थिरता सुनिश्चित होती है
इसी वजह से केंद्र और राज्य सरकारें प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही हैं।
किसानों के लिए नए अवसर
प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों को केवल लागत में कमी ही नहीं बल्कि बेहतर बाजार मूल्य मिलने की भी संभावना रहती है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण प्राकृतिक और रसायन मुक्त उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में प्राकृतिक खेती आने वाले वर्षों में किसानों के लिए आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने का बड़ा माध्यम बन सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संदेश स्पष्ट है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती के समन्वय को अपनाएं, तो कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लाई जा सकती है।




