
96 प्रतिशत से अधिक राजस्व ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण
19 हजार 805 ग्रामों का सर्वेक्षण संपन्न, शेष क्षेत्रों में कार्य युद्ध स्तर पर जारी
रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य में राजस्व ग्राम सर्वेक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भू-संपत्तियों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड (नक्शे) तैयार करना और नागरिकों को उनकी भूमि/मकान का कानूनी मालिकाना हक (स्वामित्व) प्रदान करना है। यह भूमि संबंधी विवादों को कम करने और योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए बेहद कारगर है। राजस्व विभाग ने प्रदेश के सभी 33 जिलों में फैले कुल 20 हजार 551 राजस्व ग्रामों में से 19 हजार 805 ग्रामों (लगभग 96.37 प्रतिशत) का विस्तृत सर्वेक्षण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। यह आंकड़ा राज्य में भूमि सुधार और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
19 हजार 805 ग्रामों का सर्वेक्षण पूर्ण
छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण विकास, भूमि प्रबंधन और पारदर्शी राजस्व प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित राजस्व ग्राम सर्वेक्षण अभियान बड़ी सफलता की ओर अग्रसर है। भूमि प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में राज्य ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत प्रदेश के कुल लक्षित 20 हजार 551 राजस्व ग्रामों में से 19 हजार 805 ग्रामों (96.37 प्रतिशत) का सर्वेक्षण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में केवल 746 ग्राम (3.63 प्रतिशत) ही असर्वेक्षित श्रेणी में शेष बचे हैं। इन शेष ग्रामों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से गतिमान है, जहाँ 371 ग्रामों में सर्वेक्षण का कार्य प्रक्रियाधीन है, वहीं केवल 375 ग्रामों में विभिन्न भौगोलिक व प्रशासनिक कारणों से सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ किया जाना शेष है।
मैदानी और विकसित क्षेत्रों में सर्वेक्षण का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। रायपुर जिले में 545 ग्रामों का, महासमुंद जिले में 1153 ग्रामों का, राजनांदगांव जिले में 694 ग्रामों का सर्वेक्षण का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। इसी प्रकार कबीरधाम जिले के 1011 ग्रामों का, बिलासपुर जिले के 708 ग्रामों का, जांजगीर-चांपा जिले के 450 ग्रामों का, सक्ती जिले के 465 ग्रामों का और सूरजपुर जिले के 552 ग्रामों का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर मिसाल कायम की है।
आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कार्य में तेजी
वहीं दूसरी ओर, बस्तर संभाग के दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में भौगोलिक एवं तकनीकी चुनौतियों के कारण कुछ कार्य अभी भी शेष है। आंकड़ों के अनुसार, नारायणपुर में सर्वाधिक 240 ग्राम, सुकमा में 111 ग्राम और बीजापुर में 95 ग्राम वर्तमान में असर्वेक्षित श्रेणी में हैं। हालांकि, विभाग इन क्षेत्रों में विशेष रणनीतियों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कार्य को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें से कुल 371 ग्रामों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया वर्तमान में भी गतिमान है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को लाभ
इस व्यापक सर्वेक्षण के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों में एक नए युग की शुरुआत होगी। डिजिटल और अद्यतित (Updated) भूमि रिकॉर्ड होने से भूमि संबंधी आपसी विवादों और मुकदमों में भारी कमी आएगी। किसानों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने, फसल बीमा और शासकीय योजनाओं (जैसे किसान न्याय योजना) का लाभ प्राप्त करने में सुगमता होगी। इसी तरह राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास ग्रामीण सशक्तिकरण की रीढ़ साबित हो रहा है। विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार, शेष बचे 375 ग्रामों में भी जल्द ही सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य आगामी महीनों में छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत डिजिटल और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला आदर्श राज्य बनाना है।




