MP किसान आंदोलन पर सियासी घमासान: सरकार ने बनाई 4 मंत्रियों की समिति, कांग्रेस ने घेरा तो भाजपा ने दिया जवाब

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे MP किसान आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने किसानों की मांगों पर बातचीत के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसान संगठनों से संवाद और समाधान के लिए चार मंत्रियों की समिति गठित कर दी है।
सरकार का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत और आपसी सहमति के जरिए निकाला जाएगा। वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं।
किसानों की इन मांगों को लेकर प्रदर्शन
भोपाल में बड़ी संख्या में किसान विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाना।
- खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करना।
- किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे लगातार बिजली आपूर्ति देना।
- कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान करना।
किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें राजधानी पहुंचकर आंदोलन करना पड़ा।
सरकार ने बनाई चार मंत्रियों की समिति
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों से चर्चा की जिम्मेदारी चार मंत्रियों को सौंपी है।
समिति में शामिल मंत्री:
- कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना
- लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह
- सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग
- ओबीसी कल्याण मंत्री कृष्णा गौर
यह समिति किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेगी और उनकी मांगों को समझकर सरकार के स्तर पर समाधान निकालने का प्रयास करेगी।
CM बोले- संवाद से निकलेगा समाधान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संवाद के माध्यम से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि:
- सरकार किसानों के सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है।
- किसानों के हितों को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- मंत्री और अधिकारी लगातार किसानों से बातचीत करेंगे।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था में चर्चा के जरिए रास्ता निकाला जाता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुन रही है, लेकिन आम जनता को भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर हमला बोला है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि अगर प्रदेश में किसानों की स्थिति बेहतर है तो बड़ी संख्या में किसानों को भोपाल आकर आंदोलन करने की जरूरत क्यों पड़ी।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि:
- किसानों को अपनी मांग रखने का अधिकार है।
- शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा है।
- सरकार को किसानों की मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का किया पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर राजनीति करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि:
- किसानों की उचित मांगों पर विचार किया जाएगा।
- समस्या का समाधान बातचीत से होगा।
- आंदोलन के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
आंदोलन और बातचीत पर टिकी नजरें
फिलहाल भोपाल में जारी किसान आंदोलन के बीच सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब सभी की नजर चार मंत्रियों की समिति की बैठक और उसके संभावित समाधान पर है। अगर बातचीत से सहमति बनती है तो आंदोलन खत्म होने की संभावना बढ़ सकती है।
मुख्य बातें
- भोपाल में किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चार मंत्रियों की समिति बनाई।
- समिति किसान संगठनों से बातचीत कर समाधान तलाशेगी।
- किसानों की मांगों में मूंग खरीदी, खाद व्यवस्था और बिजली आपूर्ति शामिल।
- कांग्रेस ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
- भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीति करने का पलटवार किया।
- सरकार और किसान प्रतिनिधियों की बातचीत पर सबकी नजर।




