

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम कांड मामले में बुधवार को NIA की विशेष अदालत में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई। करीब तीन दिनों तक चली अंतिम बहस के बाद अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने 31 अगस्त 2026 को फैसला सुनाने की तारीख तय की है।
अदालत में अंतिम चरण की सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी की नजरें फैसले पर टिक गई हैं। इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपनी-अपनी अंतिम दलीलें पेश की गईं।
तीन दिनों तक चली अंतिम बहस
झीरम कांड मामले में अंतिम सुनवाई सोमवार से शुरू हुई थी। पहले दिन अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अपनी अंतिम दलीलें रखीं।
इसके बाद मंगलवार को बचाव पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए अंतिम जिरह की। बुधवार को भी अदालत ने बचाव पक्ष को सुना। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से रिपीटल दलीलें पेश की गईं।
अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद NIA की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
अब 31 अगस्त को फैसला
अदालत ने मामले में निर्णय सुनाने के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है। यानी अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अब मामले में न्यायालय के फैसले का इंतजार है।
दोनों पक्षों की ओर से सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में भी फैसले का इंतजार करने की बात कही गई।
2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को माओवादियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर घात लगाकर हमला किया था। यह हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और भीषण राजनीतिक हमलों में शामिल है।
हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत सुरक्षाकर्मियों और आम लोगों की जान गई थी। इस घटना के बाद पूरे देश में इसकी व्यापक चर्चा हुई थी।
NIA की जांच के अनुसार, इस घटना में 27 लोगों की मौत और 35 लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी।
कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की हुई थी मौत
झीरम हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल और बस्तर के प्रमुख आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा समेत कई कांग्रेस नेताओं की मौत हुई थी।
हमले में कांग्रेस के काफिले को निशाना बनाया गया था। बड़ी संख्या में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था।
घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी इसकी जांच और हमले के पीछे की साजिश को लेकर लंबे समय तक सवाल उठते रहे।
NIA ने की थी मामले की जांच
झीरम कांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की थी। जांच के दौरान कई लोगों को आरोपी बनाया गया। मामले में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाए जाने के साथ बड़ी संख्या में अन्य माओवादियों को भी आरोपी बनाया गया था।
बताया गया कि करीब 150 से 200 अन्य माओवादियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया।
NIA ने मामले की जांच के दौरान 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि शेष आरोपियों के खिलाफ मामला अदालत में चलता रहा।
अब फैसले का इंतजार
लंबे समय से चल रहे इस मामले में अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अब न्यायालय के फैसले का इंतजार है। 31 अगस्त को अदालत का निर्णय सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मामले में आरोपियों को लेकर न्यायालय का क्या निष्कर्ष रहता है।
झीरम कांड छत्तीसगढ़ की राजनीति और नक्सल हिंसा के इतिहास की बेहद गंभीर घटनाओं में शामिल रहा है। घटना के वर्षों बाद भी इससे जुड़े कई सवाल राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा में रहे हैं।
फिलहाल NIA की विशेष अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है और 31 अगस्त 2026 को आने वाले फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




