

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में ट्रेलर डाला चोरी के मामले का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। चोरों ने पहले रेकी की, फिर आधी रात को वारदात को अंजाम दिया और चोरी किए गए डाला को दूसरे ट्रेलर के इंजन से जोड़कर रायपुर ले गए। वहां इसे 4.30 लाख रुपये में बेच दिया गया।
मामले की जांच में रायगढ़ पुलिस ने करीब 300 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। करीब 10 दिनों की लगातार मेहनत और तकनीकी जांच के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंची। चोरी का डाला आखिरकार बिलासपुर जिले के बेलतरा से इंजन समेत बरामद कर लिया गया।
पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वहीं चोरी का डाला खरीदने वाला एक आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
रात 2:30 बजे चोरी किया ट्रेलर डाला
मामला रायगढ़ के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। ट्रांसपोर्ट नगर, सारंगढ़ बस स्टैंड निवासी धीरज कुमार नवीन ने 2 अगस्त को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के मुताबिक, ट्रेलर क्रमांक CG 12 BK 3140 का इंजन बजरंग मोटर के अंदर था, जबकि उसका डाला/ट्रीप बजरंग मोटर उर्दना बैरियर से सीएमओ तिराहा के बीच सड़क किनारे खड़ा किया गया था।
27 जुलाई की शाम करीब 4 बजे डाला वहां खड़ा था। अगले दिन सुबह करीब 8 बजे जब मालिक मौके पर पहुंचा तो डाला गायब मिला।
इसके बाद कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
300 CCTV फुटेज ने जोड़ा चोरी का पूरा रूट
कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक अमित तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।
रात का समय होने के कारण चोरी किए गए डाला की स्पष्ट पहचान करना आसान नहीं था। इसके बावजूद पुलिस ने एक-एक फुटेज की कड़ियां जोड़ना शुरू किया।
करीब 300 CCTV फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को बड़ा सुराग मिला।
फुटेज में चोरी किया गया डाला ट्रेलर क्रमांक CG 13 AS 8857 के इंजन से जुड़ा दिखाई दिया। सबसे अहम बात यह थी कि उसके आगे एक नीले रंग की कार CG 13 BA 7639 चल रही थी।
यह कार कथित तौर पर चोरी किए गए डाला की पायलेटिंग कर रही थी।
टोल और हाईवे से बचने कच्चे रास्तों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वारदात के बाद मुख्य सड़क और टोल नाकों से बचने की पूरी कोशिश की।
चोरी किए गए डाला को रायपुर ले जाने के लिए आरोपियों ने हाईवे के बजाय बाईपास और कच्चे रास्तों का इस्तेमाल किया।
CCTV फुटेज के जरिए पुलिस ने दोनों वाहनों की गतिविधियों को जोड़ते हुए उनका रूट ट्रेस किया। आखिरकार वाहन रायपुर के कबीरनगर इलाके तक पहुंचा।
इसके बाद पुलिस ने RTO रिकॉर्ड की मदद से ट्रेलर के मालिक की जानकारी जुटाई।
RTO रिकॉर्ड से खुला आरोपियों का राज
RTO रिकॉर्ड में ट्रेलर CG 13 AS 8857 का मालिक जसविन्दर सिंह उर्फ राहुल (26) निवासी बोइरदादर, मां बिहार कॉलोनी, चक्रधरनगर, रायगढ़ मिला।
पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपने साथियों पवनदीप सिंह (32) और संदीप कुमार खत्री (29) के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने 27 जुलाई की रात करीब 2:30 बजे डाला चोरी किया और उसे दूसरे ट्रेलर के इंजन से जोड़कर रायपुर ले गए।
रायपुर में ₹4.30 लाख में बेच दिया डाला
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि चोरी का डाला रायपुर निवासी हरचरण सिंह सरदार को 4 लाख 30 हजार रुपये में बेच दिया गया था।
हरचरण सिंह के कहने पर चोरी किया गया डाला इंजन समेत बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बेलतरा में रखा गया था।
पुलिस टीम ने पतासाजी करते हुए बेलतरा पहुंचकर चोरी का डाला और इंजन बरामद कर लिया।
बरामद माल की अनुमानित कीमत करीब 13 लाख रुपये बताई गई है।
₹8 लाख की कार भी जब्त
पुलिस ने वारदात के दौरान पायलेटिंग के लिए इस्तेमाल की गई नीले रंग की कार CG 13 BA 7639 भी जब्त की है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई गई है।
इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जांच में इन मोबाइल फोन के जरिए वारदात से जुड़ी बातचीत और अन्य साक्ष्यों को भी देखा जा रहा है।
तीनों आरोपी ड्राइवरी के पेशे से जुड़े
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार तीनों आरोपी ड्राइवरी के पेशे से जुड़े हैं। वाहनों और अलग-अलग रास्तों की जानकारी का फायदा उठाकर उन्होंने चोरी की योजना बनाई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी संदीप कुमार खत्री करीब दो महीने पहले मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले में जमानत पर बाहर आया था।
वहीं चोरी का डाला खरीदने का आरोपी हरचरण सिंह सरदार फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में:
- जसविन्दर सिंह उर्फ राहुल, उम्र 26 वर्ष, रायगढ़
- पवनदीप सिंह, उम्र 32 वर्ष, रायगढ़
- संदीप कुमार खत्री, उम्र 29 वर्ष, रायगढ़
को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस ने क्या-क्या किया जब्त?
- चोरी गया ट्रेलर डाला और इंजन — करीब ₹13 लाख
- वारदात में इस्तेमाल नीली कार — करीब ₹8 लाख
- आरोपियों के मोबाइल फोन
- मामले से जुड़े अन्य आवश्यक साक्ष्य
10 दिन की मेहनत से पहुंची पुलिस आरोपियों तक
इस पूरे मामले में करीब 10 दिनों तक चली पुलिस की जांच में CCTV फुटेज सबसे बड़ा सुराग साबित हुआ। रात के अंधेरे में चोरी हुए डाला की पहचान मुश्किल थी, लेकिन पुलिस ने उसके आगे चल रही पायलेटिंग कार को जांच की अहम कड़ी बनाया।
इसके बाद CCTV कैमरों के जरिए वाहनों के रूट को जोड़ा गया और RTO रिकॉर्ड की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
SSP शशिमोहन सिंह ने कहा कि संपत्ति संबंधी अपराधों में चोरी गए माल की बरामदगी और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में करीब 300 CCTV फुटेज की जांच, तकनीकी साक्ष्यों और टीमवर्क के जरिए पुलिस को सफलता मिली।
रायगढ़ पुलिस की इस कार्रवाई ने यह भी दिखाया कि अपराधी कितनी भी सावधानी से वारदात को अंजाम दें, CCTV और तकनीकी जांच के जरिए उनकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं।




