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उफनती नदी में जिंदगी का इम्तिहान! एक-दूसरे का हाथ थाम स्कूल जाती दिखीं छात्राएं, VIDEO ने खोल दी व्यवस्था की पोल

बारिश का मौसम जहां लोगों के लिए राहत लेकर आता है, वहीं मध्य प्रदेश के मैहर जिले के एक गांव में यह मौसम स्कूली बच्चों के लिए हर दिन खतरे की घंटी बन गया है। रामनगर नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 14 स्थित करौदी गांव में बच्चों को स्कूल जाने के लिए बारिश के दौरान उफनती नदी पार करनी पड़ रही है।

नदी के दूसरी तरफ स्कूल होने के बावजूद आज तक यहां ऐसा सुरक्षित रास्ता नहीं बन सका है, जिससे विद्यार्थी और ग्रामीण आसानी से आवागमन कर सकें। न पुल है और न ही ऐसा सुरक्षित रपटा, जो बारिश के दिनों में तेज बहाव का सामना कर सके।

एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करती दिखीं छात्राएं

बुधवार को सामने आए एक वीडियो ने करौदी गांव की समस्या को सामने ला दिया। वीडियो में दो स्कूली छात्राएं तेज बहाव वाली नदी को पार करती दिखाई दे रही हैं।

दोनों छात्राएं एक-दूसरे का हाथ मजबूती से पकड़े हुए हैं। पानी का बहाव तेज है और हर कदम पर खतरा नजर आता है। इसके बावजूद वे एक-दूसरे का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे नदी पार करती हैं।

यह दृश्य केवल दो बच्चों की मजबूरी नहीं दिखाता, बल्कि उस पूरे इलाके की तस्वीर सामने लाता है, जहां बारिश के दिनों में स्कूल जाना भी चुनौती बन जाता है।

पानी बढ़ते ही बढ़ जाता है खतरा

ग्रामीणों के मुताबिक सामान्य दिनों में नदी का जलस्तर कम रहता है। ऐसे समय लोग किसी तरह नदी पार कर लेते हैं। लेकिन बारिश शुरू होते ही स्थिति बदल जाती है।

पानी बढ़ने के साथ नदी का बहाव तेज हो जाता है। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए इसे पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।

सबसे बड़ी चिंता स्कूली विद्यार्थियों को लेकर है। अभिभावकों को डर रहता है कि कहीं स्कूल जाते या लौटते समय कोई बच्चा तेज बहाव की चपेट में न आ जाए।

फिर भी पढ़ाई छूट न जाए, इस मजबूरी में कई बच्चे बारिश के दौरान भी नदी पार करके स्कूल जाने को मजबूर हैं।

पुल नहीं होने से ग्रामीण भी परेशान

करौदी की समस्या केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। बारिश के मौसम में गांव के आम लोगों को भी नदी के उफान का सामना करना पड़ता है।

पानी अधिक बढ़ने पर आवागमन मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार नदी पर पुल या सुरक्षित रपटा नहीं होने के कारण रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं।

इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है, जिन्हें जरूरी काम के लिए नदी के दूसरी ओर जाना पड़ता है।

कई बार हुआ सर्वे, लेकिन पुल का इंतजार जारी

ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल बनाने को लेकर कई बार सर्वे कराया जा चुका है। हर बार सर्वे के बाद लोगों को उम्मीद बंधी कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या खत्म होगी।

लेकिन सर्वे के बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। बारिश आते ही समस्या फिर सामने आ जाती है और बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

अभिभावकों की चिंता बढ़ी

बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय बन जाता है।

एक तरफ बच्चों की पढ़ाई जरूरी है, तो दूसरी तरफ नदी का तेज बहाव उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है। यही मजबूरी परिवारों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए।

पुल बनने तक सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था हो।

बारिश के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।

पहले किए गए सर्वे और प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों के आवागमन के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाए।

सवाल सिर्फ रास्ते का नहीं, बच्चों की सुरक्षा का है

करौदी की यह तस्वीर बताती है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी का सीधा असर बच्चों की जिंदगी पर पड़ सकता है। स्कूल तक पहुंचने के लिए उफनती नदी पार करती छात्राओं का वीडियो प्रशासन और जिम्मेदार विभागों के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।

ग्रामीण वर्षों से पुल की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना यह है कि यह वीडियो और बारिश में बच्चों की मजबूरी जिम्मेदारों तक कितनी मजबूती से पहुंचती है और करौदी को सुरक्षित रास्ता कब मिलता है।

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