


देश में चीनी के दाम बढ़ने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। महज 17 दिनों के भीतर चीनी की कीमत में करीब 19 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी का दावा किया जा रहा है। बढ़ती कीमतों को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “पूरी की पूरी अनपढ़ों की सरकार” है और सरकार को यह समझ नहीं आता कि कब कौन सा फैसला लेना चाहिए।
17 दिन में कितनी बढ़ी चीनी की कीमत?
दावे के मुताबिक, देश के थोक बाजार में चीनी की कीमत बढ़कर करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं खुदरा बाजार में इसका भाव करीब 65 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है।
सिर्फ 17 दिनों में कीमत में लगभग 19 रुपये की बढ़ोतरी का दावा ऐसे समय सामने आया है, जब देश में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है।
त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में अगर कीमतों में तेजी बनी रहती है तो इसका असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है।
केजरीवाल ने सरकार की नीति पर उठाए सवाल
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उनके मुताबिक, सरकार विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से गन्ने से एथेनॉल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही थी। केजरीवाल का दावा है कि इसका असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ा और अब देश को चीनी आयात करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए और पूछा कि ऐसी नीतियों का फायदा आखिर किसे मिल रहा है।
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता
चीनी की कीमतों में तेजी का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सितंबर से देश में त्योहारी गतिविधियां बढ़ने लगती हैं।
त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयों से लेकर कई तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा हलवाई और मिठाई कारोबार से जुड़े व्यवसायों में भी चीनी की खपत बढ़ जाती है।
अगर कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर केवल चीनी खरीदने वाले परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई और खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ने से अंतिम कीमतों पर भी दबाव आ सकता है।
क्या एथेनॉल नीति बनी वजह?
केजरीवाल ने अपने बयान में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन और चीनी की उपलब्धता के बीच संबंध को मुद्दा बनाया है।
हालांकि, चीनी की कीमत कई कारकों से प्रभावित होती है। गन्ने का उत्पादन, चीनी मिलों की उपलब्धता, स्टॉक, मांग, मौसम, निर्यात-आयात नीति और सरकारी फैसले सभी कीमत पर असर डाल सकते हैं।
इसलिए केवल एक कारण को कीमत बढ़ने की पूरी वजह मानने से पहले आधिकारिक आंकड़ों और बाजार के ताजा रुझानों को देखना जरूरी है।
आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है असर
चीनी रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से एक है। इसकी कीमत में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
खासकर त्योहारों के दौरान जब इसकी खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है, तब लगातार महंगाई आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
फिलहाल किन बातों पर नजर रहेगी?
- चीनी की थोक और खुदरा कीमतों में आगे क्या बदलाव होता है।
- त्योहारी सीजन में मांग कितनी बढ़ती है।
- घरेलू बाजार में चीनी का स्टॉक कितना उपलब्ध है।
- सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है।
- एथेनॉल उत्पादन और चीनी की उपलब्धता को लेकर नीति में कोई बदलाव होता है या नहीं।
बयानबाजी के बीच बड़ा सवाल
चीनी की कीमतों में तेजी ने एक बार फिर खाद्य महंगाई और सरकारी नीतियों को चर्चा में ला दिया है। अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आने वाले दिनों में चीनी के दाम किस दिशा में जाते हैं। खासकर त्योहारी सीजन से पहले अगर कीमतों में और तेजी आती है, तो इसका असर आम उपभोक्ता से लेकर मिठाई कारोबार तक दिखाई दे सकता है।


