मंडला में एंबुलेंस का इंतजार करती रही प्रसूता, फिर रास्ते ने भी दिया धोखा; जच्चा-बच्चा की मौत से मचा हड़कंप



मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा से परेशान 28 वर्षीय महिला को समय पर सरकारी जननी एंबुलेंस नहीं मिल सकी। परिजनों ने निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन गांव की खराब सड़क ने मुश्किल और बढ़ा दी। अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के बीच प्रसूता और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई।
घटना के बाद इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण सड़कों की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टर ने महिला को पहले से सिकलसेल बीमारी से पीड़ित बताया है और कहा कि उसे बेहतर इलाज के लिए पहले भी उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया था।
सुबह 4 बजे शुरू हुई प्रसव पीड़ा
जानकारी के अनुसार ग्राम सलेया निवासी 28 वर्षीय रुक्मणी नरेती को बुधवार तड़के करीब 4 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने सरकारी जननी एंबुलेंस के लिए संपर्क किया।
परिजनों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद एंबुलेंस समय पर गांव नहीं पहुंची। महिला की हालत लगातार बिगड़ती देख परिवार ने इंतजार करने के बजाय निजी वाहन की व्यवस्था की और उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकल पड़े।
जर्जर सड़क ने बढ़ाई परेशानी
ग्रामीण क्षेत्र से अस्पताल तक पहुंचने वाला रास्ता खराब होने के कारण निजी वाहन को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। खराब सड़क और यात्रा में लगे समय के कारण महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी।
परिजन जब महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे, तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने महिला और नवजात दोनों को मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टर ने बताई सिकलसेल बीमारी की बात
वहीं, शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीजाडांडी के डॉक्टर अक्षय हरदाह ने घटना को लेकर अलग पक्ष रखा है। डॉक्टर के मुताबिक रुक्मणी नरेती सिकलसेल बीमारी से पीड़ित थीं।
उन्होंने बताया कि महिला को पहले भी बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय मंडला और मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया था। डॉक्टर के अनुसार महिला को शाम करीब सवा पांच बजे बीजाडांडी के शासकीय अस्पताल लाया गया था। जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया।
एंबुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सरकारी जननी एंबुलेंस की उपलब्धता को लेकर उठ रहा है। ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
परिजनों की ओर से समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस कहां थी, उसे पहुंचने में देरी क्यों हुई और क्या समय पर परिवहन सुविधा उपलब्ध होती तो स्थिति अलग हो सकती थी।
सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर सवाल
यह मामला सिर्फ एंबुलेंस सेवा तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में खराब सड़कों के कारण आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली देरी भी गंभीर चिंता का विषय है।
खासकर गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और गंभीर मरीजों के मामले में कुछ मिनटों की देरी भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। मंडला की यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ सड़क और आपातकालीन परिवहन सुविधाओं की जमीनी स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है।
फिलहाल मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि जननी एंबुलेंस को सूचना कब मिली, मौके पर पहुंचने में कितनी देरी हुई और महिला की मौत में परिवहन संबंधी देरी की वास्तविक भूमिका क्या रही। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।




