
उमावाणी न्यूज
अधबीच-
बिजली चोरी- बेढंगे गानों से बिफरे गणेश
गणेश स्थापना कार्य करते थक कर चूर-चूर हो गया था, अतः घोड़ा बेचकर गहरी नींद में सो रहा था। तभी किसी के हिलान डुलाने से मेरी नींद उचट गई।आंखें मलते उठा तो देखा हमारे पण्डाल में विराजे गणेश जी मुझे हिलाए पड़े हैं। मैं उनसे पूछ पड़ा – क्या हो गया गणेश जी,चैन से सोने भी नहीं दे रहे हैं ? मेरा सवाल सुनकर वे बोले – वर्ष में केवल एक बार खास पूजते हो और विसर्जन करने के बाद भूला देते हो। तुम्हारे स्वार्थी भाव का आंकलन करके मेरे माता -पिता-भ्राता ने मुझे समझा बुझा कर भूलोक पर भेजा है। उन्होंने कहा है कि भूलोक में भयंकर बीमारियां फैल रही हैं,संभल कर रहना।
गणेशजी की बात सुनकर मैंने कहा- गणेश जी, अभी तो आपका पहला ही दिन है। हमने तो कुछ ज्यादा खिलाया पिलाया नहीं है, फिर काहे की पीड़ा है आपको? मेरे प्रश्न पर सूंड सिकोड़ते हुए वे बोले -मुझे बजबजाती गंदी नाली और कचरा के डिब्बे के करीब बिठा दिए हो। कचरे की बदबू और भीमकाय मच्छरों के हमला से मेरी स्थिति दुबले को दो आषाढ़ जैसी हो गई है। ऐसी गंदगी में रहने के कारण ही तुम लोगों को मलेरिया, हैजा, डेंगू ,कोरोना जैसी व्याधियां घेरती हैं।
कहते-कहते गणेश जी ओक-ओक करने लगे। मानो उन्हे मितली आ रही हो। बमुश्किल उसे रोकते हुए उन्होंने आगे कहा- मैंने तो सुना था कि यहां स्वच्छता अभियान चल रहा हैं,पर यहां की गंदगी को देखकर तो ऐसा कुछ लगता नहीं। तुम लोग खुद मच्छरदानी के अंदर पंखा,कूलर, एसी की हवा में आराम फरमा रहे हो और मुझे उमस भरी गर्मी ,चिपचिपाते पसीने में छोड़ दिये हो।
गणेश जी को फुसलाने की कोशिश करते हुए मैंने कहा -ओ चिन्ताहरण जी चिंता न करें। आपके पण्डाल को भी हमने रंग-बिरंगे झालर से सजाने की तैयारी की है। मेरी बात सुनकर गणेश जी चिंघाड़ते बोले – शर्म करो। मुझे सब पता है। अरे अधर्मियों शर्म करो,पवित्र कार्य भी तुम बिजली चोरी से कर रहे हो। मैं तो यहां परेशान होने के साथ ही साथ बोर हो जाऊंगा।मुझे तो…..
धीरज धरो लम्बोदर महराज।गणेश जी को मैने टोंकते हुए कहा – आपको बोर होने से बचाने के लिए गाने-बजाने की जोरदार व्यवस्था हमने की है। यह सुनकर गणेशजी के मुरझाये चेहरे पर मुस्कान की लकीर दोैड़ पड़ी। वे पूछ पड़े – अरे वाह, तो क्या इस बार नया-नया भजन तैयार किये हो ?
उनके सवाल से मैं आपा खो बैठा और गुर्राते हुए बोला – कैसी उटपंटाग बात करते हो गणेशा ? भजन-कीर्तन सुनने वाली पीढ़ी तो स्वर्ग सिधार गई है। आजकल तो पूजा पण्डाल में फिल्मी गीत बजते रहते हैं ……..चार बोतल वोडका, काम मेरा रोज का। मुन्नी बदनाम हुई। बीड़ी जलाई ले बलमवा जिगर म बड़ी आग है आदि. आदि. ।
ऐसे गानों के बोल सुन कर गणेश जी अपने कानों में उंगली ठूंसते हुए बोले – बचाओ भोले बचाओ।ऐसे गाने सुन कर तो प्राण पखेरू उड़ जायेंगे। तुम लोगों ने ऐसे बेढंगे, कानफोड़ू गाना-बजाना से ध्वनि प्रदूषण सहित संस्कृति को भी विकृत कर रखा है। तुम्हें मालूम नहीं है क्या?अंग्रेजों से देश को आज़ाद कराने, नवयुवकों को एकता के सूत्र में बांधने के लिए गणेश स्थापना प्रथा की शुरूआत बाल गंगाधर तिलक जी ने की थी। ऐसी लोकहितैषी प्रथा को ही तुमने तहस-नहस कर डाला है।
पल भर रूकने के बाद लंबी आहें भरते हुए गणेश जी बोले – बदलते वक्त के साथ मिट्टी से मूर्ति निर्माण करने के बजाय प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति बनाना, प्राकृतिक रंगों के बजाय हानिकारक रसायनिक रंगों से रंगने की शुरुआत भी तुम लोगों ने की है। ऐसी मूर्तियों को नदी, तालाब में विसर्जित करके जल प्रदूषण बढ़ाने जैसा घृणित कार्य कर रहे हो। इससे मानव सहित निरीह जीवों का जीवन खतरे में पड़ गया है।
गणेश जी की बातों ने मेरे दिल-दिमाग को झकझोर रख दिया। अपनी नासमझी और गलती का अहसास करते हुए मैं गणेश जी के चरणों पर जा गिरा और बोला – आपकी बात सौ फीसदी सत्य है गणेश जी। आपकी सौगन्ध खाकर कह रहा हूं भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। मेरा प्रण सुन कर गणेश जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। अपनी सूंड़ मेरी पीठ पर घुमाते हुए बोले- सुखी भवः।समाज में विघ्नहर्ताओं का सृजन करें विसर्जन नहीं। हमारी बातचीत समाप्त हो गई। हम दोनों चैन की नींद में सो गये।
*विजय मिश्रा ‘अमित’*
अग्रोहा सोसाइटी, रायपुर, (छग) 492013 मो 98931 23310
