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ओवेरियन कैंसर से जुड़े इन मिथकों पर ना करें यकीन, जानें क्या है सच्चाई

World Ovarian Cancer Day 2024: दुनियाभर में 8 मई को वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे मनाया जाता है। यह खास दिन विश्व भर की महिलाओं को ओवेरियन कैंसर के प्रति जागरूक करने के उद्धेश्य से मनाया जाता है। विश्व भर में ओवेरियन कैंसर महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बना हुआ है। दरअसल, ओवेरियन कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो अंडाशय में बनना शुरू होता है। इस कैंसर से पीड़ित महिला के अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। बता दें, महिलाओं में सबसे अधिक होने वाले कैंसर में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के बाद तीसरे नंबर पर ओवेरियन कैंसर ही आता है। ओवेरियन कैंसर का इलाज करने के लिए सही समय पर इसके लक्षणों का पता चलना बेहद जरूरी है। चिंता की बता यह है कि ओवेरियन कैंसर को लेकर महिलाओं के बीच कई तरह के मिथक बने हुए हैं, जो इस कैंसर की रोकथाम और शुरुआती चरण में इसके निदान में परेशानी पैदा करते हैं। ओवेरियन कैंसर से जुड़े ऐसे ही कुछ मिथकों को दूर करने के लिए प्रिस्टीन केयर की को-फाउंडर और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा साहनी ने जानकारी दी।

मिथक- ओवरी का कैंसर केवल वृद्ध महिलाओं को ही प्रभावित करता है।
सच्चाई-
ओवरी का कैंसर वृद्ध महिलाओं में भले ही ज्यादा आम है, लेकिन यह किसी भी उम्र की महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। यह खतरा 20 और 30 वर्ष की महिलाओं के लिए भी बना रह सकता है। ऐसे में हर उम्र की महिलाओं को इस कैंसर के लक्षणों और जोखिम कारकों के बारे में जागरूक रहना बेहद जरूरी है।

मिथक- ओवरी कैंसर के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते हैं।
सच्चाई-
ओवरी का कैंसर अक्सर अस्पष्ट लक्षणों के साथ सामने आता है, जिन्हें अन्य कम गंभीर स्थितियों के रूप में समझने की गलती की जा सकती है। इन लक्षणों में सूजन, पेट में दर्द, खाने में कठिनाई या जल्दी पेट भरा हुआ महसूस होना शामिल हो सकते हैं। इन संकेतों को जल्दी पहचानने से कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाने के साथ-साथ उपचार के बेहतर नतीजे हासिल हो सकते हैं।

मिथक- ओवरी का कैंसर हमेशा जानलेवा होता है।
सच्चाई-
ओवरी का कैंसर गंभीर हो सकता है, खासतौर पर यदि इसका निदान अंतिम चरण में किया जाए, लेकिन यह हमेशा जानलेवा नहीं होता है। उपचार और शुरुआती चरण में निदान के तरीकों में हुई उन्नति के कारण जीवित रहने की दर में सुधार हो रहा है। नियमित जांच और जोखिम कारकों के बारे में जागरूकता उपचार, परिणामों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

मिथक- केवल ओवरी के कैंसर की फैमिली हिस्ट्री वाली महिलाओं को ही जोखिम होता है।
सच्चाई-
हालांकि ओवरी के कैंसर की फैमिली हिस्ट्री होने से आपका जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन कई बार ज्यादातर मामले उन महिलाओं में भी देखें गए हैं, जिनके परिवार में इस कैंसर की कोई हिस्ट्री नहीं रही है। अन्य जोखिम कारक, जैसे उम्र, मोटापा, प्रजनन इतिहास और कुछ अनुवांशिक उत्परिवर्तन भी अंडाशय के कैंसर के विकास में योगदान कर सकते हैं।

मिथक- नियमित जांच से ओवरी के कैंसर का पता लगाना आसान है।
सच्चाई-
कुछ अन्य कैंसरों की तुलना में अंडाशय के कैंसर के लिए वर्तमान में ऐसी कोई भी विश्वसनीय स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं हैं, जिसकी सामान्य लोगों के लिए सिफारिश की जा सके। हालांकि अंडाशय या स्तन कैंसर या कुछ अनुवांशिक उत्परिवर्तन के मजबूत फैमिली हिस्ट्री वाली महिलाओं को विशेष जांच या निवारक उपायों से फायदा हो सकता है।

मिथक- ओवरी के कैंसर की रोकथाम की जा सकती है।
सच्चाई- जीवनशैली में जरूरी बदलाव करके आप अंडाशय के कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं। जिसमें स्वस्थ वजन बनाए रखने, नियमित व्यायाम करने और तंबाकू उत्पादों से परहेज करने जैसी आदतें शामिल हैं। इसके अलावा उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में मौखिक गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल करने और जोखिम कम करने वाली सर्जरी कराने से अंडाशय के कैंसर के विकास के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

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