Ayushman Yojana पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन! नियम तोड़ने वाले अस्पतालों पर 1.16 करोड़ का जुर्माना, कई पर लटकी डीलिस्टिंग की तलवार

उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उन अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन पर मरीजों से अवैध वसूली, गलत बिलिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सही पाए गए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि गरीबों के इलाज के लिए बनी इस योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज्य में आयुष्मान भारत योजना का संचालन करने वाली संस्था स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस (SACHIS) ने जांच के बाद कई अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की है। अब तक दोषी पाए गए अस्पतालों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, जिसमें से लगभग 60 लाख रुपये की वसूली भी की जा चुकी है।
अनियमितता करने वाले अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई
साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा के अनुसार, जांच के दौरान कई अस्पतालों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। इनमें प्रमुख रूप से मरीजों से नकद पैसे लेना, गलत मेडिकल कोड का उपयोग कर अधिक भुगतान का दावा करना (अपकोडिंग) और अन्य वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं।
सरकार ने ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके लंबित सरकारी भुगतान (रिइंबर्समेंट) पर रोक लगा दी है। इससे शेष जुर्माने की राशि वसूलने की प्रक्रिया भी तेज होगी।
बार-बार नियम तोड़ने वालों पर डीलिस्टिंग की तैयारी
सरकार केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। जिन अस्पतालों पर बार-बार नियमों के उल्लंघन के आरोप साबित हो रहे हैं, उन्हें आयुष्मान योजना के पैनल से हटाने (डी-इम्पैनल) की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ लेने वाले मरीजों को बिना किसी आर्थिक बोझ और परेशानी के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
800 अस्पतालों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
एक ओर जहां कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार अस्पतालों की कार्यप्रणाली सुधारने पर भी जोर दे रही है।
इसी उद्देश्य से प्रदेश के 800 अस्पतालों के डॉक्टरों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अस्पतालों को आधुनिक डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के मानकों के अनुरूप काम करने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान इन विषयों पर विशेष फोकस रहा—
- डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड का सही प्रबंधन।
- मरीजों की पारदर्शी सेवा प्रक्रिया।
- योजना के नियमों का पालन।
- तकनीकी समस्याओं का समाधान।
- शिकायतों का त्वरित निस्तारण।
अच्छे अस्पतालों को मिलेगा इंसेंटिव
सरकार केवल कार्रवाई ही नहीं कर रही, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को प्रोत्साहित भी करेगी।
जो अस्पताल NABH के गुणवत्ता मानकों का बेहतर तरीके से पालन करेंगे और मरीजों को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएंगे, उन्हें विशेष इंसेंटिव दिया जाएगा। इससे अस्पतालों के बीच गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
केंद्रीय अस्पताल भी होंगे नेटवर्क में शामिल
उत्तर प्रदेश सरकार अब आयुष्मान योजना के नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में भी काम कर रही है।
योजना के तहत भविष्य में केंद्र सरकार के प्रमुख अस्पतालों को भी नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इससे गंभीर बीमारियों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं पहले से अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
सरकार का साफ संदेश
सरकार का कहना है कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए शुरू की गई है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रमुख बातें एक नजर में
- 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना दोषी अस्पतालों पर लगाया गया।
- लगभग 60 लाख रुपये की वसूली पूरी हो चुकी है।
- कई अस्पतालों के सरकारी भुगतान पर रोक लगाई गई।
- बार-बार नियम तोड़ने वालों की डीलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू।
- 800 अस्पतालों के डॉक्टरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
- बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को मिलेगा इंसेंटिव।
- केंद्रीय अस्पतालों को भी आयुष्मान योजना से जोड़ने की तैयारी।




