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कानपुर में एक्सपायरी दवा बेचने का आरोप, मरीज की तबीयत बिगड़ी; मेडिकल स्टोर की होगी जांच?

कानपुर। मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में लंबे समय से इलाज करा रहे कल्याणपुर निवासी मरीज अभय ने अस्पताल के बाहर स्थित एक मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के बाद तबीयत बिगड़ने का आरोप लगाया है। अभय का कहना है कि उन्होंने चिकित्सालय के बाहर स्थित लकी मेडिकल स्टोर से जेडोसेफ एंटीबायोटिक खरीदी थी। दवा खाने के बाद उनकी हालत खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल पहुंचना पड़ा और भर्ती कराया गया।

मरीज का दावा है कि दवा के रैपर की जांच करने पर उस पर मार्च 2026 की तारीख दर्ज मिली। अभय ने इसे एक्सपायरी दवा बताते हुए मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर करने की बात कही है। हालांकि, दवा के सेवन और मरीज की तबीयत बिगड़ने के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध अभी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

लंबे समय से अस्पताल में चल रहा इलाज

जानकारी के अनुसार, कल्याणपुर निवासी अभय लंबे समय से मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में अपना इलाज करा रहे हैं। बीमारी के इलाज के लिए उन्हें समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श और दवाओं की जरूरत पड़ती है।

अभय के मुताबिक, इसी क्रम में उन्होंने चिकित्सालय के बाहर स्थित लकी मेडिकल स्टोर से जेडोसेफ एंटीबायोटिक खरीदी। उनका कहना है कि दवा का सेवन करने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।

हालत खराब होने पर वह अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया और उन्हें भर्ती कर लिया गया। इसके बाद अभय और उनके परिजनों ने दवा के पैकेट और रैपर की जांच की।

रैपर पर मार्च 2026 की तारीख मिलने का दावा

अभय का आरोप है कि दवा के रैपर पर मार्च 2026 की तारीख दर्ज थी। उन्होंने दावा किया कि दवा की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद उसे उन्हें बेच दिया गया।

दवाओं के पैकेट पर निर्माण और समाप्ति तिथि महत्वपूर्ण जानकारी होती है। किसी भी दवा को खरीदने और इस्तेमाल करने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखना आवश्यक होता है।

यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि दवा वास्तव में एक्सपायरी थी और उसे मरीज को बेचा गया, तो यह गंभीर मामला माना जा सकता है। हालांकि, फिलहाल यह मरीज की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

मुख्यमंत्री पोर्टल पर करेंगे शिकायत

अभय ने कहा है कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। उनका कहना है कि शिकायत के जरिए वह पूरे मामले की जांच चाहते हैं, ताकि यह पता चल सके कि उन्हें कथित तौर पर एक्सपायरी दवा कैसे बेची गई।

शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग मेडिकल स्टोर के दस्तावेज और दवा के स्टॉक की जांच कर सकता है। दवा का बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और उपलब्ध स्टॉक मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

यदि जरूरत पड़ती है तो दवा का नमूना प्रयोगशाला जांच के लिए भी भेजा जा सकता है। इससे दवा की गुणवत्ता और उसकी स्थिति के संबंध में तथ्य सामने आ सकते हैं।

मेडिकल स्टोरों की निगरानी पर भी सवाल

घटना ने अस्पतालों के आसपास संचालित मेडिकल स्टोरों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीज अक्सर चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर आसपास की दुकानों से दवाएं खरीदते हैं।

ऐसे में मरीजों को सही और सुरक्षित दवा उपलब्ध कराना मेडिकल स्टोर संचालकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। दवा की एक्सपायरी डेट की जांच किए बिना उसकी बिक्री स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

वहीं, मरीजों के लिए भी जरूरी है कि दवा खरीदते समय पैकेट पर दर्ज एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और अन्य जरूरी जानकारी ध्यान से जांच लें। किसी भी तरह की शंका होने पर दवा लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर होता है।

तबीयत बिगड़ने के कारण की जांच जरूरी

अभय ने दवा खाने के बाद तबीयत बिगड़ने का आरोप लगाया है। हालांकि, किसी दवा के सेवन के बाद स्वास्थ्य खराब होने मात्र से यह निश्चित नहीं माना जा सकता कि समस्या उसी दवा के कारण हुई।

इसके लिए चिकित्सकीय रिकॉर्ड, मरीज की पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थिति, दवा की गुणवत्ता और अन्य संभावित कारणों की जांच जरूरी होगी। अस्पताल में भर्ती होने के बाद चिकित्सकों द्वारा किए गए उपचार और जांच की रिपोर्ट भी मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इसी तरह रैपर पर दर्ज तारीख की भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि जरूरी होगी। यदि मूल पैकेट और दवा का बैच उपलब्ध है तो जांच एजेंसियों के लिए मामले की सच्चाई तक पहुंचना आसान हो सकता है।

जांच से साफ होगी तस्वीर

फिलहाल मामला मरीज के आरोपों तक सीमित है। अभय द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत किए जाने के बाद संबंधित विभाग की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवा की बिक्री में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

जांच के दौरान मेडिकल स्टोर के लाइसेंस, दवा खरीदने और बेचने के रिकॉर्ड, स्टॉक तथा संबंधित बैच की अन्य दवाओं की भी जांच की जा सकती है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

मामले में सबसे अहम बात यह होगी कि दवा की वास्तविक एक्सपायरी तिथि और मरीज की तबीयत बिगड़ने के कारण की पुष्टि वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के जरिए हो।

अभय की शिकायत के बाद अब निगाह संबंधित विभाग की कार्रवाई पर है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल एक मरीज की परेशानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दवा बिक्री व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।

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