MP में साइबर ठगी का बड़ा जाल! 7 महीने में 260 करोड़ की लूट, ऐसे बचाएं अपना बैंक अकाउंट


भोपाल। मध्यप्रदेश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश में साइबर ठगी से जुड़ी करीब 60 हजार शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान लोगों से लगभग 260 करोड़ रुपये की ठगी की गई। राहत की बात यह है कि पुलिस और बैंकों की मदद से करीब 75 करोड़ रुपये होल्ड कराए जा चुके हैं।
हालांकि, बड़ी रकम अब भी साइबर अपराधियों के कब्जे में है। ऐसे में साइबर ठगी का शिकार होने के बाद शुरुआती कुछ मिनट और घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
7 महीने में 60 हजार शिकायतें
स्टेट साइबर सेल तक जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच लगभग 60 हजार शिकायतें पहुंचीं। इनमें डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लोन, पार्सल, निवेश और ऑनलाइन कमाई के नाम पर लोगों को ठगने के मामले शामिल हैं।
साइबर ठग लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। कभी पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर डराया जाता है तो कभी निवेश पर मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा दिया जाता है।
260 करोड़ की ठगी, 75 करोड़ रुपये होल्ड
पुलिस के मुताबिक साइबर अपराधियों ने सात महीनों में करीब 260 करोड़ रुपये की ठगी की। कार्रवाई के दौरान करीब 75 करोड़ रुपये होल्ड कराने में सफलता मिली है।
इससे साफ है कि ठगी के तुरंत बाद शिकायत करना सबसे जरूरी कदम है। जितनी जल्दी बैंक और पुलिस को सूचना मिलेगी, रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
इन राज्यों से चल रहा ठगी का नेटवर्क
जांच में सामने आए मामलों के अनुसार साइबर अपराध के कई नेटवर्क देश के अलग-अलग हिस्सों से संचालित किए जा रहे हैं। मेवात, अलवर, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों का नाम जांच में सामने आया है।
वहीं डिजिटल अरेस्ट से जुड़े कुछ मामलों में दक्षिण एशिया के देशों से संचालित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
मध्यप्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर और सतना से साइबर अपराध की बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आई हैं।
डिजिटल अरेस्ट से लेकर फर्जी निवेश तक
साइबर ठग लोगों को भरोसे और डर दोनों का इस्तेमाल करके निशाना बना रहे हैं। ठगी के प्रमुख तरीकों में शामिल हैं:
- डिजिटल अरेस्ट: पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर डराना।
- फर्जी पार्सल: पार्सल में अवैध सामान मिलने का दावा करके पैसे मांगना।
- फर्जी लोन: आसान लोन के नाम पर पहले फीस या अलग-अलग चार्ज वसूलना।
- इन्वेस्टमेंट फ्रॉड: कम समय में पैसा दोगुना या बड़ा मुनाफा देने का लालच।
- ऑनलाइन टास्क: घर बैठे कमाई का झांसा देकर लगातार पैसे जमा करवाना।
- OTP फ्रॉड: बैंक या अन्य सेवा के नाम पर OTP और गोपनीय जानकारी हासिल करना।
साइबर ठगी से बचने के 7 आसान तरीके
साइबर अपराधियों से बचने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं:
- अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल तुरंत स्वीकार न करें।
- पुलिस, ED, CBI या किसी अन्य एजेंसी के नाम पर फोन आने पर घबराएं नहीं।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड न करें।
- OTP, PIN, CVV और बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें।
- अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- पैसे दोगुने करने या आसान कमाई के लालच में निवेश न करें।
- साइबर ठगी होते ही तुरंत 1930 पर शिकायत करें और National Cyber Crime Reporting Portal
- पर शिकायत दर्ज करें।
ठगी के बाद ‘गोल्डन टाइम’ न गंवाएं
अगर आपके खाते से पैसे निकल गए हैं तो शर्म या डर के कारण चुप न बैठें। तुरंत बैंक को सूचना दें और 1930 पर कॉल करें।
शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर संबंधित खाते या ट्रांजैक्शन को होल्ड कराने की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ठगी के बाद जितनी जल्दी कार्रवाई होगी, रकम वापस मिलने या उसे आगे जाने से रोकने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
सबसे जरूरी बात: डरें नहीं, तुरंत एक्शन लें
साइबर ठगों की सबसे बड़ी ताकत उनका डर और लालच पैदा करना है। वे कभी पुलिस अधिकारी बनकर डराते हैं तो कभी निवेश और कमाई का सपना दिखाते हैं।
याद रखें—कोई असली पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर आपको डिजिटल अरेस्ट करके पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर नहीं करता। इसी तरह कोई भी वैध बैंक कर्मचारी आपसे फोन पर OTP, PIN या CVV नहीं मांगता।
सतर्क रहें, लालच से बचें और ठगी होते ही 1930 पर तुरंत शिकायत करें। साइबर अपराध में कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है।




