

नई दिल्ली। NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों और भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों और उनके बीच की बात में BCI को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।
मामला NALSAR के 2026 बैच के उन लॉ छात्रों से जुड़ा है, जिन्होंने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत से डिग्री लेने का विरोध किया था। विवाद के बाद BCI की ओर से इन छात्रों के वकील के रूप में नामांकन को लेकर निर्देश जारी किए गए थे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और NALSAR के छात्रों तथा फैकल्टी के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी।
‘छात्र मेरा विरोध कर रहे हैं तो BCI को दखल की जरूरत नहीं’
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान BCI के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि NALSAR के छात्र उनका विरोध कर रहे हैं, तो यह उनके और छात्रों के बीच की बात है।
उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों द्वारा अपनी राय रखने को केवल इसलिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश का विरोध किया है।
CJI ने यह भी कहा कि युवा छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भी उस समय विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय रहते थे।
‘छात्रों का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए’
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में छात्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता दिखाई दी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि किसी युवा को अपनी बात रखने के कारण उसके करियर पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने छात्रों को आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कहा कि उन्हें जल्द से जल्द वकालत का लाइसेंस लेना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट बार में प्रैक्टिस के लिए आना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को कानूनी सहायता से जुड़े कामों में अवसर दिया जा सकता है।
CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणियां
- छात्रों के विरोध को लेकर BCI को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
- विरोध करने वाले छात्रों के करियर को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
- छात्रों को जल्द वकालत का लाइसेंस लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस और कानूनी सहायता के काम में अवसर देने की बात कही गई।
क्या है NALSAR विवाद?
दरअसल, हैदराबाद स्थित NALSAR University of Law के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था।
हालांकि कुछ छात्रों ने उनके हाथों डिग्री लेने का विरोध किया। विरोध के कारण दीक्षांत समारोह को स्थगित करना पड़ा।
इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। BCI की ओर से NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के वकील के तौर पर नामांकन को लेकर कार्रवाई की बात सामने आई।
BCI ने विश्वविद्यालय से मामले पर रिपोर्ट भी मांगी थी। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार करने की बात कही गई थी।
BCI ने क्या कहा था?
BCI की ओर से यह तर्क दिया गया था कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान BCI की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि छात्रों के एनरोलमेंट से संबंधित विवादित निर्देश वापस ले लिया गया है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में BCI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
छात्रों और फैकल्टी पर कार्रवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ फिलहाल किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।
इससे विवाद में शामिल छात्रों को बड़ी राहत मिली है। अदालत के रुख से यह स्पष्ट संकेत गया है कि किसी छात्र की असहमति या विरोध को उसके पेशेवर भविष्य से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
CJI ने छात्रों को दिया सकारात्मक संदेश
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत का छात्रों के प्रति रुख खास तौर पर चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा उनसे असहमति रखता है या उनके खिलाफ कुछ कहता है तो उसे अपनी बात कहने दी जानी चाहिए।
उन्होंने छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्हें वकालत के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब NALSAR विवाद में छात्रों के विरोध, BCI के निर्देश और उनके संभावित पेशेवर भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे थे।
विवाद में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
BCI के शुरुआती निर्देशों के बाद मामले पर राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कुछ लोगों और संगठनों ने BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की।
हालांकि सुनवाई के दौरान BCI ने संबंधित निर्देश वापस लिए जाने की जानकारी अदालत को दी।
आगे क्या?
अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद BCI को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। फिलहाल NALSAR के छात्रों और फैकल्टी को दंडात्मक कार्रवाई से राहत मिली है।
NALSAR विवाद ने छात्रों के अभिव्यक्ति के अधिकार, बार काउंसिल की भूमिका और युवा कानून छात्रों के पेशेवर भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में CJI सूर्यकांत की टिप्पणियां इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू बनकर सामने आई हैं।




