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रायपुर अग्रसेन महाविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ का आयोजन

रायपुर उमा वाणी अग्रसेन महाविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ का आयोजन

शिक्षण संस्थानों में महिला उत्पीड़न की समस्या पर हुई संगोष्ठी

रायपुर. अग्रसेन महाविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ द्वारा ” शिक्षण संस्थाओं में महिला उत्पीड़न की समस्या”- विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

श्रीमती शताब्दी सुबोध पांडे का कहना है कि सार्वजनिक शैक्षणिक और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा पर समग्र दृष्टिकोण से ध्यान देने की जरूरत है।

अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए मौजूदा कानूनों के कार्यान्वयन को मजबूत करने की जरूरत है।

पेशेवर संस्थानों और संगठनों के सहयोग से कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शहरों और संस्थानों की सुरक्षा और सामाजिक ऑडिट होना अनिवार्य है।
केवल महिलाओं को ही नहीं पुरुषों को भी समझना होगा समाज में क्यों असामाजिक तत्व पनप रहे हैं।
केवल बेटियों को हो नही बेटों को भी संभालने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष शताब्दी सुबोध पण्डे ने कहा कि तमाम जागरूकता के बावजूद आए दिन महिला उत्पीड़न की ख़बरें आती रहती है. ऐसे में महिलाओं को ही इसके लिए सचेत होने की जरुरत है. साथ ही संस्थाएं भी अपने महिलाप्रकोष्ठ को इतना अधिकार सम्पन्न बनाए कि वह ऐसे मामलों का तत्काल संज्ञान लेकर पीड़ित महिला के साथ न्याय करने को तत्पर रहे.

शताब्दी पांडे ने बताया कि कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा कई पहल की गई हैं। कुछ पहलों में निर्भया फंड, मिशन शक्ति, सेफ सिटी प्रोजेक्ट, शी-बॉक्स 2.0, सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पुलिस द्वारा निगरानी बढ़ाना, शहर में अंधेरे स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था, स्कूल और कॉलेज स्तर पर लिंग संवेदीकरण कार्यक्रम शामिल हैं। अन्य समान कार्यक्रम.

उन्होंने कहा कि मीडिया में आने वाली नकारात्मक ख़बरों से समाज में ऐसा वातावरण बन जाता है कि जैसे हर तरफ सिर्फ अत्याचार ही है. कुछ भी सकारात्मक नहीं हो रहा. जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है. उन्होंने कोलकाता और भुवनेश्वर में महिलाओं के साथ हाल ही में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पढ़ी-लिखी होने के बाद भी महिलाऐं अपने साथ होने वाला अत्याचार को लेकर अभी भी सुरक्षित नहीं हो पाई है, यह चिंता का विषय है. इसके लिए समाज में भी संस्कार और एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को नए सिरे से स्त्थापित करना होगा.
इस मौके पर महाराजाधिराज अग्रसेन शिक्षण समिति के अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के डायरेक्टर डॉ वी.के. अग्रवाल ने स्वागत भाषण में कहा कि जिस समाज या संस्था में महिलाओं के प्रति सम्मान होता है, वही समाज और संस्था सही अर्थों में प्रगति के लिए तैयार हो पाते हैं. हमारे देश में यूं भी नारी को देवी मानने की परम्परा हजारों वर्षों से रही है. महाराजाधिराज अग्रसेन शिक्षण समिति के सचिव एवं महाविद्यालय के एडमिनिस्ट्रेटर डॉ अमित अग्रवाल ने महिला प्रकोष्ठ के आयोजन को उद्देश्यपूर्ण बताते हुए कहा कि महिलाओं के साथ अत्याचार को रोकने के लिए कानून में मौजूद प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता है. आभार प्रदर्शन करते हुए प्राचार्य डॉ युलेन्द्र कुमार राजपूत ने कहा कि अग्रसेन महाविद्यालय में महिलाओं के प्रति बहुत ही सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बना हुआ है. साथ ही यहाँ के विभिन्न प्रकोष्ठों सहित महिला प्रकोष्ठ में भी कभी किसी बड़ी शिकायत का नहीं मिलना भी इस बात का प्रमाण है कि इतने वर्षों में यह संस्थान महिलाओं के प्रति कितना सम्मान रखता है. कार्यक्रम का संचालन महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी तथा योग संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ मंजू सिंह ठाकुर ने किया. उन्होंने कहा कि महिला और पुरुष जब साथ में सहयोग की भावना से काम करते हैं तो फिर उनके बीच आदर रहता है, ऐसे में पुरुष स्वयं महिला की सुरक्षा की चिंता करते हैं. हमें इसी स्थिति के लिए प्रयास करना चाहिए. कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों की सक्रिय भागीदारी रही.

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