
अडानी ग्रुप अपने कामकाज के तरीके और कर्मचारियों की टीम में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य एक ऐसी वर्कफोर्स तैयार करना है, जो युवा हो, जिसमें महिलाओं की भागीदारी ज्यादा हो। इसके साथ ही कंपनी डेली के रूटीन कामों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोट्स को सौंपने जा रही है, ताकि कर्मचारी ज्यादा महत्वपूर्ण और रणनीतिक कामों पर ध्यान दे सकें। इस बड़े बदलाव को समझने के लिए इसके मुख्य बिंदुओं को नीचे आसान भाषा में समझाया गया है।
1- थ्री-प्रोंग्ड स्ट्रेटजी
अडानी ग्रुप में इस बदलाव की कमान परिवार और कंपनी के टॉप अधिकारियों ने संभाली है। गौतम अडानी (चेयरमैन) कुछ भूमिकाओं को आउटसोर्सिंग को सौंपने के काम की देखरेख कर रहे हैं। वहीं, करण अडानी (मैनेजिंग डायरेक्टर, अडानी पोर्ट्स) कंपनी में युवाओं को शावमिल करने और विविधता (Diversity) बढ़ाने के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। जुगेशिंदर सिंह (ग्रुप CFO) को AI और इंसानों के मिलकर काम करने वाले मॉडल (Cobotic Workforce Model) को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। हाल ही में उन्हें HR और IT जैसे विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।
2- कोबोटिक मॉडल
कंपनी एक ऐसा सिस्टम बना रही है, जहां AI और इंसान मिलकर काम करेंगे। डाटा एंट्री, बिल बनाना (Invoice Generation) और सैलरी कैलकुलेशन जैसे तय नियमों वाले काम अब AI बॉट्स करेंगे। वहीं, सेल्स, बिजनेस स्ट्रेटेजी और क्लाइंट मैनेजमेंट जैसे कामों में मुख्य भूमिका इंसानों की ही रहेगी, लेकिन उन्हें असिस्ट करने के लिए AI मौजूद होगा। इसके अलावा परफॉर्मेंस रिव्यू करने के लिए कंपनी अब मैनेजरों के फीडबैक के बजाय AI और स्कोर-बेस्ड (अंकों पर आधारित) सिस्टम से कर्मचारियों के काम का मूल्यांकन करने की योजना बना रही है।
3- युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता
अडानी ग्रुप अपनी टीम की औसत उम्र को कम करना चाहता है और महिलाओं की संख्या बढ़ाना चाहता है।
युवाओं को मौका:- कंपनी अनुभवी लोगों के बजाय ऊर्जावान और युवा प्रोफेशनल्स को काम पर रखने और उन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के लिए लीडरशिप प्रोग्राम शुरू कर रही है।
महिलाओं की हिस्सेदारी:- साल 2025-26 के अंत तक ग्रुप में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 5% थी। इसे सुधारने के लिए उदाहरण के तौर पर अडानी पावर ने महिला ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनीज की भर्ती बढ़ाई है, जिससे वहां महिलाओं का अनुपात बढ़ा है।
4- छोटा और सपाट संगठनात्मक स्ट्रक्चर
फैसले तेजी से लिए जा सकें, इसके लिए कंपनी अपने मैनेजमेंट के लेवल को घटाकर केवल 3 लेयर्स स्ट्रक्चर (Three-Layer Structure) में समेट रही है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे इन-हाउस कामों को बाहरी वेंडर्स को आउटसोर्स किया जा रहा है। इसके तहत कई ऑन-साइट कर्मचारियों को वेंडर्स के पेरोल पर शिफ्ट किया गया है। उदाहरण के लिए अडानी ग्रीन एनर्जी के आंतरिक कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कमी आई है,क्योंकि काम वेंडर्स को दे दिया गया है।
बदलाव के बीच चुनौतियां और कर्मचारियों की चिंताएं
इतने बड़े और तेजी से हो रहे बदलावों के कारण कर्मचारियों के बीच थोड़ी घबराहट और असंतोष भी देखा जा रहा है।
सैलरी हाइक पर असर:– इस साल अप्रैल में पुरानी व्यवस्था के तहत हुए अप्रेजल से कई कर्मचारी नाखुश दिखे, क्योंकि नया AI सिस्टम अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।
वेंडर शिफ्ट का विरोध:- गुजरात के हजीरा पोर्ट पर कुछ क्रेन ऑपरेटरों ने तब हड़ताल कर दी, जब उन्हें वेंडर के पेरोल पर शिफ्ट किया गया, क्योंकि वे कंपनी के कर्मचारियों को मिलने वाले विशेष बोनस से वंचित रह गए थे।
मैनेजमेंट का भरोसा:- कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई शुरुआत में शुरुआती दिक्कतें आती हैं। इसे दूर करने के लिए खुद गौतम अडानी और सीनियर लीडरशिप सीधे ग्राउंड लेवल पर जाकर कर्मचारियों से बात कर रहे हैं, ताकि उनका भरोसा बना रहे।
अडानी ग्रुप का यह प्रयोग भारत के कॉर्पोरेट जगत के लिए एक नया उदाहरण पेश कर सकता है। यदि यह सफल रहता है, तो देश की अन्य बड़ी कंपनियां भी AI के इस दौर में अपनी वर्कफोर्स को इसी तरह री-डिजाइन कर सकती हैं।
कुल मिलाकर अडानी समूह का यह कदम दिखाता है कि भारत की बड़ी कंपनियां अब AI, डिजिटल तकनीक और आधुनिक कार्य संस्कृति की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य बड़ी कंपनियों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।




