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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होते ही EC पहुंची कांग्रेस, बोली- RO ने कानून नहीं पढ़ा, ‘2+2 को 7’ जैसा फैसला

मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने का मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने निर्वाचन अधिकारी (RO) के फैसले को न केवल कानूनी रूप से गलत बताया है, बल्कि इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ भी करार दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की और नामांकन रद्द करने के फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की।

कांग्रेस का दावा है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई लंबित आपराधिक मामला नहीं है, जिसकी जानकारी नामांकन पत्र में देना कानूनन जरूरी हो। पार्टी का कहना है कि निर्वाचन अधिकारी ने कानून की गलत व्याख्या करते हुए उनका पर्चा खारिज कर दिया।

चुनाव आयोग पहुंचा कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल

बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख नेता:

  • केसी वेणुगोपाल
  • अभिषेक मनु सिंघवी
  • जयराम रमेश
  • विवेक तन्खा

नेताओं ने आयोग के समक्ष विस्तार से अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि नामांकन रद्द करने का फैसला पूरी तरह गैर-कानूनी है।

क्या है पूरा विवाद?

भाजपा की ओर से शिकायत की गई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में एक न्यायिक नोटिस का उल्लेख नहीं किया। इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।

कांग्रेस का तर्क है कि जिस मामले का हवाला दिया गया है, वह अभी प्रारंभिक स्तर पर है और अदालत ने अब तक उसका संज्ञान भी नहीं लिया है। ऐसे में उसे “लंबित आपराधिक मामला” नहीं माना जा सकता।

सिंघवी ने फैसले को बताया ‘2+2 को 7’

वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने निर्वाचन अधिकारी के निर्णय की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि यह गलती केवल “2+2 को 5” लिखने जैसी नहीं, बल्कि “2+2 को 7” लिखने जितनी गंभीर है। उनके अनुसार, कानून की मूल अवधारणाओं को नजरअंदाज कर यह फैसला लिया गया है।

कांग्रेस का कानूनी तर्क क्या है?

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनावी हलफनामे में केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है:

  • जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो।
  • जिन मामलों में अदालत द्वारा आरोप तय (Charges Framed) किए जा चुके हों।

पार्टी का दावा है कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में इन दोनों में से कोई भी स्थिति मौजूद नहीं है।

नोटिस और आपराधिक केस में क्या अंतर?

कांग्रेस के अनुसार, नटराजन को केवल अदालत की ओर से एक नोटिस मिला था, जिसमें उन्हें उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया था।

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार:

  1. नोटिस जारी होता है।
  2. अदालत मामले का संज्ञान लेने पर विचार करती है।
  3. संज्ञान लेने के बाद जांच आगे बढ़ती है।
  4. चार्जशीट दाखिल होती है।
  5. आरोप तय किए जाते हैं।

कांग्रेस का कहना है कि मामला अभी पहले चरण से भी पहले की स्थिति में है, इसलिए इसे लंबित आपराधिक मामला मानना गलत है।

चुनाव आयोग से क्या मांग की गई?

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि:

  • नामांकन रद्द करने के आदेश की समीक्षा की जाए।
  • निर्वाचन अधिकारी के फैसले को निरस्त किया जाए।
  • राज्यसभा चुनाव में निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

पार्टी नेताओं का कहना है कि आयोग ने मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रेरित है और विपक्ष की सीट छीनने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं भाजपा की ओर से अभी तक यही कहा जा रहा है कि नामांकन पत्र में सभी आवश्यक जानकारियां देना उम्मीदवार की जिम्मेदारी होती है।

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