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नेशनल बोन एंड ज्वाइंट डे पर जानें बढ़ती उम्र में कैसे रखें हडि्डयों की सेहत…

National Bone And Joint Day 2023: देशभर में हर साल इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन द्वारा 4 अगस्त को नेशनल बोन एंड ज्वाइंट डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य भारतीय जनता के बीच हड्डी के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करना है। साल 2013 में इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 80 फीसदी शहरी आबादी में विटामिन डी की कमी है। जो कि हड्डियां कमजोर होने की एक बड़ी वजह है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ-साथ भी व्यक्ति की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में फोर्टिस अस्पताल (शालीमार बाग) के डायरेक्‍टर एंड एचओडी आर्थोपेडिक्स डॉ अमित पंकज अग्रवाल से जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर कैसे बढ़ती उम्र में हडि्डयों की सेहत का ध्यान रखा जा सकता है।

डॉ अमित कहते हैं कि एजिंग यानि उम्र का बढ़ना ऐसी प्रक्रिया है, जो व्यक्ति के शरीर को ही नहीं बल्कि उसकी हरेक कोशिका तक को प्रभावित करती है। एजिंग की वजह से व्यक्ति की हडि्डयां प्रभावित होने की वजह से कमजोर होने लगती हैं। यही वजह है कि बढ़ती उम्र में हडि्डयों की सेहत और उन्‍हें मजबूत बनाए रखने पर डॉक्टर खास जोर देते हैं।

बढ़ती उम्र में बढ़ने लगता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा-
उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ता है। यह ऐसी सामान्‍य स्थिति है जिससे बचने की व्यक्ति को हर संभव कोशिश करनी चाहिए। अक्‍सर, यह देखा गया है कि 50 साल से अधिक उम्र के लोगों की इसी वजह से हड्डी टूट जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, बोन लॉस भी बढ़ता रहता है और यह नई हड्डी बनने की रफ्तार से कहीं अधिक तेजी से होता है, लेकिन इस स्थिति से निपटना आसान है। जरूरी यह है कि आप हर कीमत पर अपनी हडि्डयों का बचाव करें, बढ़ती उम्र में तो ऐसा करना और भी जरूरी हो जाता है।

महिलाएं रखें खास ख्याल-
महिलाओं को अपनी बोन हेल्थ को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के पहले 5 से 7 वर्षों में वह अपनी 20 प्रतिशत बोन डेन्सिटी खो देती हैं।

बढ़ती उम्र में ऐसे रखें अपनी बोन हेल्थ का ध्यान- 

कैल्शियम सप्लीमेंट –
50 साल से अधिक उम्र की महिलाएं और 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को प्रतिदिन 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्‍यकता होती है। इस आयुवर्ग से कम उम्र के पुरुषों और महिलाओं को कम से कम 1,000 मिलीग्राम कैल्शियम का सेवन करना चाहिए। इसके लिए कैल्शियम युक्‍त खाद्य पदार्थों और दूध का पर्याप्‍त मात्रा में सेवन करें। कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों में शामिल हैं- स्किम्‍ड दूध, दही, मेवे, और सैल्‍मन मछली भी कैल्शियम का अच्‍छा स्रोत मानी जाती है।

प्रोटीन तथा माइक्रोन्यूट्रिएंट्स-
भोजन में अधिक प्रोटीनयुक्‍त खाद्य पदार्थों और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे विटामिन के, पोटेशियम और मैग्नीशियम को शामिल करने से भी हडि्डयों की सेहत में सुधार होता है। इसके अलावा पोटेशियम से भरपूर सब्जी और फल जैसे कि शकरकंदी, पालक, केले और मैग्नीशियम युक्‍त खाद्य पदार्थों जैसे बीन्‍स, बीजों, मेवों और साबुत अनाजों को भी शामिल करने से लाभ होता है।

विटामिन डी3 सप्लीमेंट –
प्रतिदिन कम से कम 600 से 800 इंटरनेशनल यूनिटों के सेवन का लक्ष्‍य रखें।

नियमित व्‍यायाम- 
नियमित रूप से व्‍यायाम करने से भी बोन डेंसिटी को मेंटेन करने में मदद मिलती है। जिस तरह व्‍यायाम करने से मांसपेशियों को फायदा मिलता है उसी तरह शारीरिक गतिविधियों को करने से व्यक्ति की हडि्डयां भी मजबूत बनी रहती हैं। इसके अलावा, आप वजन उठाने वाले व्‍यायाम जैसे कि सैर या वेट लिफ्टिंग भी कर सकते हैं। ये सभी चीजें हडि्डयों को मजबूत बनाने में खासतौर से प्रभावी होती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधियां जैसे कि सैर करने से हमारी बोन डेन्सिटी में सुधार होता है, और लो बोन मास वाली पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं की हडि्डयों को भी ताकत मिलती है।

शरीर का वजन कंट्रोल रखें-
सामान्‍य से कम वजन होने पर बोन लॉस और फ्रैक्चर की आशंका बनी रहती है। जबकि जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ने पर बाजू या कलाई में फ्रैक्चर का खतरा बना रहता है। ऐसे में बोन हेल्‍थ को बनाए रखने के लिए हेल्दी बॉडी वेट बनाकर रखें।

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